अक्षरम कि ओर से आयोजित दो दिवसीय 6th-7th feb आठवा अन्तरराष्ट्रीय  हिंदी उत्सव नई दिली  में संपन हुआ. कार्यक्रम का उदेघतन डोक्टर कर्ण सिंह ने किया . कार्यक्रम के पहले दिन हिंदी में सूचना प्रोद्योगिकी -नया आयाम , प्रवाशी हिंदी साहित्य -अस्मिता का प्रश्न , अन्तरराष्ट्रीय  कविता गोष्ठी ,नाट्य मंचन "कठगुलाब " का आयोजन किया गया . दुसरे दिन के कार्यक्रम में विदेशों में हिंदी शिक्षरन  ,  राम कथा विविध प्रयोग ,हिंदी में वेब पत्रकारिता ,हिंदी सृजनसिलाता नई जमीन ,सामान अर्पण समारोह ,अक्षरम सामान २०१० ,और अन्तरराष्ट्रिय कवी समेलन का आयोजन किया गया.डॉ कर्ण सिंह विदेशो में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए हर कदम उठाने कि बात कि. प्रो.अशोक चक्रधर ने  विदेशों में हिंदी शिक्षर्ण  के सत्र में कहा कि हिंदी को मनोरंजनात्मक भाषा  के साथ रोजगारपरक भाषा भी बनना चाहिए . प्रोधोगिकी और विदवनों  को एक जुट होकर भाषा को बढ़ाने का काम करना चाहिए.  इस के अलावा विदेशों से आये हिंदी के प्रो. ने अपने अनुभव बटे . जर्मनी से आई प्रो तात्याना ओरास्कयिया ने बताया कि सोवियेत संघ के समय हिंदी कुछ विस्वविद्यालय में ही पढाई जाती थी लेकिन इस समय १६ से अधिक विस्वविद्यालय में हिंदी पढाई जा रही है.इसराइल से आये प्रो. गेनादी स्लोम्पेर ने कहा कि  इसराइल के लोग विस्वा में अनेक संस्कृतियो को जानने के लिए हिंदी शिखना चाहते है .रूस कि प्रो. तात्याना दुव्यास्काया ने बताया कि विदेशों में हिंदी शिखने के नए केंद्र खुले है.उन्होंने कहा कि उनके देश में लोग पर्यटन ,बोलीवउड़ ,डांस के लिए हिंदी शिखना चाहते है लेकिन हिंदी को अनादाता भाषा बनना  होगा. डॉ हरजेंन्द्र चोधेरी ने बताया कि भाषा कि अपनी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि होती है .जहा भारतीय संस्कृति पहले पहुच गयी वह भाषा सिखने में आसानी होती है और जहा देर से पहुची है वह थोड़ी मुश्किल होती है .उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम को लचीला बनाने कि जरुरत है ,

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asharam ki or se ayojit do diwsiya aathwa anterrastriya hindi utsav nai dili me sampan hua.des videsh se aaye hindi ke vidwano se milne aur unke vicharo ko janne ka sobhgya prapta hua.isme karn singh,k.l.nandan, ratnakar pandey,genadi oraskaya naresh bhartiya duwasakya aniljoshi nares shadiya ashoke chakradher kavita vacheknavee sateyendra srivastavchitra mugdal aadi logo se milne ka mauka mila.

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