patrakarita ek shuruaat

आखिर एक पत्रकार कि  शुरुआत कब होती है जब वो अपनी पढाई पूरी कर के फिएल्ड में उतरता है  या अपने कॉलेज के  समय से करता है . बड़ा ही दिलजस्प मुद्दा है  जिसे कभी किसी ने नहीं बताया होगा  शुरुआत तो करनी होगी. चलिए ऑफिस के पहले दिन से शुरू करते है. सबसे पहले ही दिन आप से कोई नया आईडिया के बारे लोग जानना चाहेंगे . अगर  शहर  नया और आप नए  हो तो कई मुश्किल आप के सामने आ सकती है . चलिए ये तो शुरु के दिन है जब कोई स्टोरी नहीं होगी तो आप क्या करेंगे . जब शुरुआत  कर दी है तो क्या डरना.चलिए पहले दिन काम कि शुरुआत करते है. पुरे दिन शहर में ghumne ke bad jab sham ko office lotte है तो  कोई स्टोरी शायद  नहीं  मिली होगी. मिलेगी भी नहीं क्योंकि थेओरी और प्रक्टिकल में बहुत अंतर है . सूत्र  तो नै शहर में bane  नहीं होंगे . तो न्यूज़ कहा से आएगी. कोई बात नहीं dushere दिन kar lenge lekin dushare दिन भी bhatkne ke bad कोई स्टोरी नहीं मिलेगी तो ser में dard jarur से ho jayega. lekin shayad kisi ne thik hi kaha hai ruk jana nahi tu kahi har ke kante milenge jiwan me hajar re

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