जी हुजूर मिलेगा लड्डू जरूर

जी हुजूर मिलेगा लड्डू जरूर


यह विडम्बना कब होगी समाप्त
आज ग्वालियर में मुख्यमंत्री आ रहे है और उनके आने की तैयारियों में सारे विभाग लगे हुए है। विभाग के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सभी डरे हुए भी है। यह सब डर केवल काम चोरी के नतीजे के कारण हो रहा है। अब तक कोई काम विभाग की ओर से किया गया होता तो शायद मुख्यमंत्री जी के पीछे जी हुजूरी करने वाले दिखाई नहीं देते।

गड्ढा निर्माण विभाग का हाल- मंत्री जी के आने जाने कि प्लानिंग पहले से ही कर ली गई है। चलो भाई कोई बात नहीं प्लांनिंग तो होनी चाहिए लेकिन यहां का नजारा तो दूसरा है। मंत्री जी जिस रास्ते से आएंगे उसकी मरम्मत का काम भी शुरू हो गया है जिससे असलियत सामने ना आ सके। गड्ढा निर्माण विभाग सड़क मार्ग में आने वाले गड्ढा को भरने में लग गया है। रोड के चारों ओर चूने डाले जा रहे है।

बिजली गुल विभाग- रात दिन बिजली का रोना रो रहा है शहर लेकिन उसे इस समस्या से निजात दिलाने वाला कोई नहीं है। जानते है न कि आज मंत्री जी आ रहे है कुछ पल के लिए बिजली समस्या से मुक्ति मिलेगी और उनका मंच तो बिजली कटौती से तो बचा ही रहेगा।

नगर गंदगी निगम- अरे भाई, मंत्री जी आ रहे है और बड़ी ही मुस्तैदी के साथ ही मैदानों की सफाई चल रही है। लेकिन आप यह मत समझिए कि आप के वार्ड की सफाई हो जाएगी। गंदगी विभाग केवल अपने लोगों का ध्यान रखता है। मैदानों पर जाए तो सारे सफाईकर्मियों की फौज लगी है। टेंट तो वाटरफ्रुफ लगे है कि कहीं मंत्री जी बारिश के मौसम में गिले ना हो जाए। ध्यान तो आने वाली पब्लिक का भी रखा गया है। लेकिन इन्हे केवल लॉली पॉप देकर फु सलाने का काम किया गया है।

पॉलिस करो विभाग- पॉलिस करो विभाग आज पूरी मुस्तैदी से शहर में सुरक्षा पर नजर लगाए बैठा है। मंत्री जी की पॉलिस कैसे की जाए इसका पूरा ध्यान दिया गया है। ७०० से ८०० पुलिसकर्मियों को जनता की सुरक्षा करने के लिए लगाया गया है। अधिकारी तो मंत्री जी को पॉलिस करेगें। शहर में आपराधिक घटना होती रहे इससे इस विभाग पर असर नहीं पड़ता है। मंत्री जी को भ्रम में डालने के लिए तो हौवा दिखाना पड़ेगा ही।

भीड़-भाड़ बढ़ावो विभाग- चिंता करने की जरूरत नहीं है मंत्री जी जिस रास्ते से आएंगे वहां ट्रैफिक नहीं मिलेगी। और सभी चौराहों पर भी ट्रैफिककर्मी नजर आएगें। एक दिन पहले ट्रैफिक को आपरेट करने के लिए प्रैक्टिस की जा चुकी है। जब मंत्री जी चले जाएगें तो आप भीड़ भाड़ में टक्कराते रहना इससे विभाग को फर्क नहीं पडऩे वाला है।

बस हो चुका आज अपना शहर साफ, सुंदर व स्वच्छ दिखेगा लोग सोच रहे है। घोषणाओं की क्रीम तो बरसेगी ही इसलिए विभागों ने क्रीम हार्वेसिटगं के लिए जुगाड़ कर लिया है।

patrakarita ek shuruaat

आखिर एक पत्रकार कि  शुरुआत कब होती है जब वो अपनी पढाई पूरी कर के फिएल्ड में उतरता है  या अपने कॉलेज के  समय से करता है . बड़ा ही दिलजस्प मुद्दा है  जिसे कभी किसी ने नहीं बताया होगा  शुरुआत तो करनी होगी. चलिए ऑफिस के पहले दिन से शुरू करते है. सबसे पहले ही दिन आप से कोई नया आईडिया के बारे लोग जानना चाहेंगे . अगर  शहर  नया और आप नए  हो तो कई मुश्किल आप के सामने आ सकती है . चलिए ये तो शुरु के दिन है जब कोई स्टोरी नहीं होगी तो आप क्या करेंगे . जब शुरुआत  कर दी है तो क्या डरना.चलिए पहले दिन काम कि शुरुआत करते है. पुरे दिन शहर में ghumne ke bad jab sham ko office lotte है तो  कोई स्टोरी शायद  नहीं  मिली होगी. मिलेगी भी नहीं क्योंकि थेओरी और प्रक्टिकल में बहुत अंतर है . सूत्र  तो नै शहर में bane  नहीं होंगे . तो न्यूज़ कहा से आएगी. कोई बात नहीं dushere दिन kar lenge lekin dushare दिन भी bhatkne ke bad कोई स्टोरी नहीं मिलेगी तो ser में dard jarur से ho jayega. lekin shayad kisi ne thik hi kaha hai ruk jana nahi tu kahi har ke kante milenge jiwan me hajar re

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हिंदी भाषा को लेकर आज तरह तरह के जो खेल खेले जा रहे है . वह आम आदमी को और भी कठिन राह पर धकेलने के लिए पर्यापत है . विदेशी विस्वविद्यालय भारत आ रहे है अपने विस्वविद्यालय को तो इस स्टर का बना ना सके आब चलो दुसरे के भरोसे ही सही . आजादी के बाद अंग्रेजी के भरोसे थे .हिंदी भाषा बर्बाद कर दी .कब जागेगी ये सरकार और कब जागेंगे हम.
अक्षरम कि ओर से आयोजित दो दिवसीय 6th-7th feb आठवा अन्तरराष्ट्रीय  हिंदी उत्सव नई दिली  में संपन हुआ. कार्यक्रम का उदेघतन डोक्टर कर्ण सिंह ने किया . कार्यक्रम के पहले दिन हिंदी में सूचना प्रोद्योगिकी -नया आयाम , प्रवाशी हिंदी साहित्य -अस्मिता का प्रश्न , अन्तरराष्ट्रीय  कविता गोष्ठी ,नाट्य मंचन "कठगुलाब " का आयोजन किया गया . दुसरे दिन के कार्यक्रम में विदेशों में हिंदी शिक्षरन  ,  राम कथा विविध प्रयोग ,हिंदी में वेब पत्रकारिता ,हिंदी सृजनसिलाता नई जमीन ,सामान अर्पण समारोह ,अक्षरम सामान २०१० ,और अन्तरराष्ट्रिय कवी समेलन का आयोजन किया गया.डॉ कर्ण सिंह विदेशो में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए हर कदम उठाने कि बात कि. प्रो.अशोक चक्रधर ने  विदेशों में हिंदी शिक्षर्ण  के सत्र में कहा कि हिंदी को मनोरंजनात्मक भाषा  के साथ रोजगारपरक भाषा भी बनना चाहिए . प्रोधोगिकी और विदवनों  को एक जुट होकर भाषा को बढ़ाने का काम करना चाहिए.  इस के अलावा विदेशों से आये हिंदी के प्रो. ने अपने अनुभव बटे . जर्मनी से आई प्रो तात्याना ओरास्कयिया ने बताया कि सोवियेत संघ के समय हिंदी कुछ विस्वविद्यालय में ही पढाई जाती थी लेकिन इस समय १६ से अधिक विस्वविद्यालय में हिंदी पढाई जा रही है.इसराइल से आये प्रो. गेनादी स्लोम्पेर ने कहा कि  इसराइल के लोग विस्वा में अनेक संस्कृतियो को जानने के लिए हिंदी शिखना चाहते है .रूस कि प्रो. तात्याना दुव्यास्काया ने बताया कि विदेशों में हिंदी शिखने के नए केंद्र खुले है.उन्होंने कहा कि उनके देश में लोग पर्यटन ,बोलीवउड़ ,डांस के लिए हिंदी शिखना चाहते है लेकिन हिंदी को अनादाता भाषा बनना  होगा. डॉ हरजेंन्द्र चोधेरी ने बताया कि भाषा कि अपनी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि होती है .जहा भारतीय संस्कृति पहले पहुच गयी वह भाषा सिखने में आसानी होती है और जहा देर से पहुची है वह थोड़ी मुश्किल होती है .उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम को लचीला बनाने कि जरुरत है ,

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asharam ki or se ayojit do diwsiya aathwa anterrastriya hindi utsav nai dili me sampan hua.des videsh se aaye hindi ke vidwano se milne aur unke vicharo ko janne ka sobhgya prapta hua.isme karn singh,k.l.nandan, ratnakar pandey,genadi oraskaya naresh bhartiya duwasakya aniljoshi nares shadiya ashoke chakradher kavita vacheknavee sateyendra srivastavchitra mugdal aadi logo se milne ka mauka mila.

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